दमिश्क़ में चार साल काम करने के बाद 1965 में कोहीन को सीरियाई इंटैलीजेन्स ने धर दबोचा और उसी साल 18 मई को कोहीन को दमश्क़ के मरजा स्क्वायर पर फांसी दे दी गई।
उस समय से इस्राईल हमेशा इस कोशिश में रहा कि इस जासूस का शव उसे मिल जाए मगर सीरियाई सरकार ने इस्राईल की मांग को हर बार ठुकरा दिया। सीरियाई सरकार का कहना है कि इस्राईली जासूस के दफ़्न की जगह किसी को नहीं मालूम है।
अब इसी संबंध में एक इस्राईली लेखक ने सीरिया में कोहीन के पकड़े जाने की घटना के बारे में कुछ नए आयाम बयान किए हैं। इस्राईली टीवी चैनल ने एक डाक्युमेंट्री भी प्रसारित की जिसका नाम है हमारा वह आदमी जो दमिश्क़ में है। इस डाक्युमेंट्री में कोहीन के अंजाम के बारे में कुछ नई जानकारियां देने की कोशिश की गई है।
इस्राईली लेखक अमीर ग़ीरा का कहना है कि दो विचार पाए जाते हैं। एक विचार यह है कि कोहीन ने पूरी तरह सावधानी नहीं बरती। यह विचार मोसाद का है। मगर दूसरा विचार यह है कि मोसाद ने अपने एजेंट से संपर्क करने के दौरान कहीं ग़लती कर दी जिसके नतीजे में वह पकड़ा गया।
कोहीन के परिवार का आरोप है कि ग़लती इस्राईली सरकार और मोसाद ने की जिसके नतीजे में कोहीन पकड़ा गया और उसे फांसी पर चढ़ा दिया गया, बल्कि इस्राईली सरकार ने उसके साथ विश्वासघात किया।
कोहीन के पकड़े जाने के बाद उस समय मोसाद के प्रमुख माईर अमीत ने कहा था कि मोसाद से कहीं कोई ग़लती नहीं हुई, कोहीन इसलिए पकड़ा गया कि उसने पूरी तरह सावधानी नहीं बरती और अपनी गतिविधियों और संपर्क में वह ग़लत आत्म विश्वास का शिकार हो गया।
एली कोहीन की पत्नी नादिया कोहीन ने इस्राईली टीवी से बातचीत में कहा कि पकड़े जाने से पहले एली कोहीन से जो मुलाक़ात हुई थी उसमें उसने बताया था कि उसका भयानक अंजाम होने वाला है। एली कोहीन तो इस्राईल में अपने घर से निकलते समय ही मर चुका था। वह बेजान था क्योंकि उसे अच्छी तरह पता था कि अब वह वापस नहीं आएगा। इसीलिए उसने हमसे इस तरह विदाई ली जैसे आख़िरी विदाई हो। नादिया का कहना है कि मेरा पती तो मारा गया लेकिन इस्राईली सरकार ने मुझे एक बार नहीं कई बार क़त्ल किया। मेरे छोटे छोटे बच्चों को भी ख़मियाज़ा भुगतना पड़ा। हमें सड़क पर छोड़ दिया गया।
एली कोहीन को ट्रेनिंग देने वाले अफ़सर नतान सोलोमोन का कहना है कि एली कोहीन को भर्ती करना बड़ा कठिन काम था। क्योंकि वह अपने भीतर मौजूद क्षमताओं को इस्तेमाल करने के लिए तैयार नहीं था। फिर जब उसे तैयार किया गया और ट्रेनिंग दी गई तो उस समय भी मोसाद के भीतर यह विचार था कि इसे ज़्यादा दिनों तक इस्तेमाल नहीं करना है। यानी यह हुआ कि जासूसी के मिशन के बीच में ही एली कोहीन को मोसाद ने बड़ी ख़ामोशी से नौकरी से निकाल दिया और वह दरअस्ल उस जाल में फंस गया जो मोसाद ने बिछाया था।